बेरंगीं शहर का इंद्रधनुष
इलस्ट्रेटर, लेखक और कथावाचक-
प्रतिम गर्ग
पाथवेज़
विश्वविद्यालय प्रेस

काले पहाड़ और सफ़ेद नदी के बीच में बेरंगी नाम का एक शहर था। वहाँ सब कुछ हमेशा स्लेटी रंग का रहता था। दिन में, रात में, सब मौसम में सब कुछ स्लेटी। किसी को भी कुछ नहीं पता चलता था।
बेरंगी शहर में हर चीज़ स्लेटी थी। स्लेटी सब्ज़ियाँ, स्लेटी फ़ूल, स्लेटी पेड़, स्लेटी किताबें, स्लेटी खिलौने, स्लेटी फल, स्लेटी घर, स्लेटी कपड़े, स्लेटी जानवर, स्लेटी पक्षी, स्लेटी तितलियाँ।
वह एक उदास शहर था।
वहाँ की रानी उदास रहने से परेशान हो गई थी। उसने राजा को कहा हमारे शहर को खुश कैसे करें?
राजा ने अपने दोस्त जादूगर रंगदार को बुलाने का सोचा। जादूगर रंगदार जादू से उसी दिन ही वहाँ आ गया।



राजा ने जादूगर रंगदार को सब बताया। जादूगर ने अपने जादुई बैग में से एक चमकीला हीरा निकाला और उसे खिड़की के पास लेकर गया। रोशनी पड़ते ही हीरे से रंगीन इंद्रधनुष बन गया और बेरंगी शहर के आसमान में फैल गया।
इंद्रधनुष की पहली पट्टी के लाल रंग में से कुछ चीज़े लाल हो गई - लाल सेब, लाल गाजर, लाल गुलाब, लाल टमाटर, लाल खिलौने, लाल कपड़े, लाल ईंट।
इंद्रधनुष की दूसरी पट्टी के नारंगी रंग में से कुछ चीज़े नारंगी हो गई - नारंगी संतरा, नारंगी गेंदा, नारंगी किताबें, नारंगी टोपियाँ, नारंगी पपीता, नारंगी तितलियाँ।
इंद्रधनुष की तीसरी पट्टी के पीले रंग में से कुछ चीज़े पीली हो गई -पीली मक्की, पीला सूरज, पीले केले, पीली बतख़, पीली मुर्गी, पीली स्कूल बस।
इंद्रधनुष की चौथी पट्टी के हरे रंग में से कुछ चीज़े हरी हो गई - हरे पेड़, हरी पत्तियाँ, हरे ग़ुब्बारे, हरी घास, हरे मेंडक, हरा पालक, हरे अंगूर, हरा कछुआ।
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बेरंगीं शहर का इंद्रधनुष
बेरंगी शहर में कोई रंग होने के कारण सब लोग उदास रहते थे। जादूगर रंगदार ने वहाँ रंग बिखेर कर बेरंग शहर को ख़ुशियों से भर दिया।

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