










फसलों के त्योहार
बच्चों आप जानते ही हैं कि भारत त्योहारों का देश है। यहांँ मनाए जाने वाले ज्यादातर त्योहार फसलों पर आधारित होते हैं।बच्चों मैं आपको बता दूंँ दीपावली का त्यौहार भी फसलों पर आधारित त्यौहार है। यह त्यौहार खरीफ की फसल पकने की खुशी में मनाया जाता है। आशीर्वादी धान से निकली खील और मुरमुरे से लक्ष्मी पूजन किया जाता है।इसी प्रकार मकर संक्रांति का त्यौहार भी पुरे भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। आप जानते हैं मकर सक्रांति का त्योहार पूरे भारतवर्ष में क्यों मनाते हैं? इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में चला जाता है?
सूर्य की किरणों में गर्माहट आ जाती है। सर्दी धीरे-धीरे खत्म होती जाती है और वसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है।
मकर संक्रांति का त्यौहार पूरे भारतवर्ष में विभिन्न नामों से मनाया जाता है
जैसे
बिहार में खिचड़ी का पर्व
पंजाब में लोहड़ी
झारखंड सरहुल
केरल ओणम
तमिल नाडु पोंगल
उत्तर प्रदेश मकर संक्रांति
गुजरात पतंग का पर्व
असम बीहू
कुमायूं घुघुतिया


बिहार खिचड़ी
बिहार में मकर संक्रांति का त्यौहार खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है। बिहार में केले के पत्तों पर गुड़, तिल, चावल , चूड़ा-दही और तिलकुट को इकट्ठा कर कर इनको दान किया जाता है। इसके पश्चात घर के सभी परिवार के सदस्य आंगन में एक साथ बैठकर इन सब चीजों को खाते हैं।प्राचीन काल में तो ईंट के चूल्हे पर बड़े-बड़े कड़ाहों मैं खिचड़ी बनाई जाती थी। सब लोग नदी के किनारे मिलकर मस्ती करते थे और इस खिचड़ी के त्यौहार को बड़ी धूमधाम से मनाते थे। बिहार में इस त्यौहार को खिचड़ी का नहीं खुशियों का त्योहार कहा जाता है



झारखंड सरहुल
सरहुल झारखंड का त्यौहार है। झारखंड में सरहुल बड़े जोश के साथ मनाया जाता है। यह आदिवासियों का त्यौहार है। इस त्यौहार को अलग-अलग जनजातियांँ अलग-अलग समय में मनाती हैं। इस त्यौहार का जश्न 4 दिन तक चलता रहता है। संथाल के लोग इस त्यौहार को फरवरी-मार्च में,ओरांव डॉग ऐसे मार्च-अप्रैल में मनाते हैं। आदिवासी आमतौर पर प्रकृति की पूजा करते हैं। सरहुल के दिन विशेष रुप से साल के पेड़ की पूजा की जाती है। यही समय है जब साल के पेड़ों में फूल आने लगते हैं और मौसम बहुत ही खुशनुमा हो जाता है। स्त्री स्त्री पुरुष दोनों ही ढोल - मजीरे लेकर रात भर नाचते हैं। इसी दिन धान की पूजा की जाती है और आशीर्वादी धान अगली फ़सल में बोया जाता है।
कुमाऊं घुघुतिया
कुमाऊं में मकर संक्रांति को घुघुतिया भी कहते हैं। इस दिन आटा और गुड़ को गूँधकर पकवान बनाए जाते हैं। इन पकवानों को तरह-तरह के आकार दिए जाते हैं। जैसे- डमरु, तलवार, दाड़िम का फूल आदि। इन्हें तलने के बाद एक माला में पिरोया जाता है। माला के बीच संतरा और गन्ने की गंडेरी पिरोई जाती है। सुबह बच्चों को यह माला दी जाती है। बहुत ठंड के कारण पक्षी पहाड़ों में चले जाते हैं। उन्हें बुलाने के लिए बच्चे इस माला से पकवान तोड़ - तोड़ कर पक्षियों को खिलाते हैं और गाना गाते हैं।




तमिलनाडु पोंगल
तमिलनाडु में मकर संक्रांति या फसलों से जुड़े त्यौहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। इस दिन खरीफ की फसलें चावल,अरहर, मसूर आदि कटकर घरों में पहुँचती हैं और लोग नए धान को कूटकर चावल निकालते हैं। हर घर में मिट्टी का नया मटका लाया जाता है। जिसमें नए चावल, दूध और गुड़ डालकर उसे पकने के लिए धूप में रख देते हैं। हल्दी शुभ मानी जाती है इसलिए साबुत हल्दी को मटके के मुंँह के चारों ओर बांँध देते हैं। जैसे ही दूध में उफान आता है और दूध चावल मट्के से बाहर गिरने लगता है पोंगला- पोंगल,पोंगला- पोंगल का स्वर वातावरण में गूंँज उठता है।



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